महासमुंद। जिले में राशन कार्ड से जुड़े कार्यों में आ रही परेशानियों को लेकर महासमुंद के पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया में जाति और निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता से गरीब परिवारों को परेशानी हो रही है। उनके अनुसार, जिले में हजारों आवेदन महीनों से लंबित हैं।
चंद्राकर ने कहा कि नए राशन कार्ड बनाने, परिवार के सदस्यों के नाम जोड़ने या हटाने तथा त्रुटियों में सुधार के आवेदन जनपद पंचायतों, नगर पालिका और नगर पंचायतों में लंबित पड़े हैं। उनका आरोप है कि खाद्य विभाग का पुराना पोर्टल बंद होने और नए स्मार्ट पीडीएस पोर्टल के शुरू नहीं होने से राशन कार्ड संबंधी काम प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राशन कार्ड में नाम दर्ज नहीं होने से पात्र हितग्राहियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन मिलने में परेशानी हो रही है। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के कार्ड बनवाने में भी दिक्कतें आने का दावा किया। इससे जरूरतमंद परिवारों के सामने राशन और इलाज से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो रही हैं।
चंद्राकर ने नवीन राशन कार्ड के लिए पटवारी प्रतिवेदन, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, मुखिया का फोटो, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, जन्म प्रमाण पत्र और परिवार का सामूहिक फोटो मांगे जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग को छोड़कर अन्य वर्गों से जाति प्रमाण पत्र की अनिवार्यता उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों को बनवाने के लिए गरीब परिवारों को विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पूर्व विधायक ने सरकार से मांग की कि नया स्मार्ट पीडीएस पोर्टल जल्द शुरू किया जाए, दस्तावेजों की अनिवार्यता की समीक्षा की जाए और लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि राशन जैसी बुनियादी सुविधा पाने के लिए गरीब परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए।
इस खबर में पोर्टल की स्थिति, लंबित आवेदनों की संख्या और दस्तावेजों संबंधी नियमों को लेकर विनोद चंद्राकर के आरोप और मांगें शामिल हैं। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।








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