बागबाहरा। जिले के प्रसिद्ध दैवीय माता तीर्थ स्थल खल्लारी गांव के आदिवासी प्री - मैट्रिक बालक छात्रावास खल्लारी की छत टूटने की सूचना मिलते ही जनपद पंचायत बागबाहरा के उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार तत्काल छात्रावास पहुंचे और भवन की स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्रावास की छत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त पाया गया, कई खिड़कियां टूटी हुई थीं, दीवारों पर सीलन और सीपेज के निशान थे तथा बरसात का पानी फर्श पर आ रहा था। इस जर्जर स्थिति को देख छात्रावास में रह रहे बच्चों ने अपनी सुरक्षा को लेकर भय और चिंता व्यक्त की। जनपद उपाध्यक्ष ने बच्चों से आत्मीयता से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी और भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।
बता दें कि खल्लारी में आदिवासी प्री - मैट्रिक बालक छात्रावास का शुभारंभ 1985 में हुआ था। तब से वही छात्रावास आदिवासी गरीब बच्चों के लिए उपयोग में आ रहा है। भवन पुरी तरह से जर्जर हालत में है। छत की छड़ जंग लगकर सड़ गया है। छत से से लगातार प्लास्टर टुट कर गिर रही है। दिवालों में नमी है। इस बीच छात्रावास में करीब 29 बच्चे रहने को विवश हैं। मानो उन बच्चों के पढ़ाई के भविष्य में ज़िंदगी दांव पर लग गया है। भवन के खराब हालत को देख डरे सहमें रहने को क्षेत्र के आदिवासी बच्चे मजबुर हैं।
वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद उपाध्यक्ष श्री व्यवहार ने तत्काल कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से दूरभाष पर चर्चा कर छात्रावास की बदहाल स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कलेक्टर से भवन की तकनीकी जांच कराकर शीघ्र मरम्मत और बच्चों की सुरक्षा हेतु ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने मंडल संयोजक आदिवासी विभाग मनोज कुमार चौधरी को निर्देशित किया कि बागबाहरा विकासखंड में संचालित सभी 18 आदिवासी छात्रावासों का सघन निरीक्षण कराया जाए और जहां भी भवन जर्जर हो या मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो वहां तत्काल सुधार कार्य सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर जनपद उपाध्यक्ष ने कहा कि शासन आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा और कल्याण के लिए छात्रावासों का संचालन करता है ऐसे में इन बच्चों को सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण, बेहतर भोजन और पढ़ाई के लिए अनुकूल सुविधाएं मिलना अत्यंत आवश्यक है। यह किसी व्यक्ति या विभाग पर आरोप लगाने का विषय नहीं बल्कि व्यवस्थाओं की समीक्षा और सुधार का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी विद्यार्थियों के हित को प्राथमिकता देने की बात करती है तो उसकी सार्थकता तभी सिद्ध होगी। जब गांव, गरीब, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों को भी वही सुरक्षा और सुविधाएं मिलें जो बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों को मिलती हैं। गरीब बच्चों की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाना जनप्रतिनिधि के रूप में हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत खल्लारी के सरपंच पुष्पेंद्र साहू ने छात्रावास के नियमित रख रखाव की आवश्यकता पर जोर दिया वहीं, उपसरपंच तारेश साहू ने बच्चों से भोजन और पढ़ाई व स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। जनपद उपाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि छात्रावासों में किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत अनिवार्य है। जनपद उपाध्यक्ष श्री व्यवहार के निरिक्षण के दौरान बागबाहरा मंडल संयोजक आदिवासी विभाग मनोज कुमार चौधरी, खल्लारी अधीक्षक तेजेन्द्र सिंह परिहार, बी.के.बाहरा अधीक्षक धर्मेन्द्र कुमार प्रधान, कर्मचारी इन्द्रकुमार दिवान, रमेश कुम्भकार समेत छात्रावास के बच्चे उपस्थित रहे।
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✨ ग्राम पंचायत खल्लारी क्षेत्र के अंतर्गत आदिवासी प्री - मैट्रिक बालक छात्रावास का पुरा भवन जर्जर हालत में है, कभी अप्रिय घटना घट सकती है। कई बार छात्रावास निरिक्षण किया हुं। कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिया हुं। इसके बाद भी विभाग कुंभकर्णीय निंदा में है। शायद प्रशासन को किसी अप्रिय घटना की इंतजार है।
पुष्पेन्द्र कुमार साहू, सरपंच - ग्राम पंचायत खल्लारी
✨ खल्लारी में आदिवासी प्री - मैट्रिक बालक छात्रावास (भवन) की स्थिति अत्यंत दयनीय है। भवन कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। विकास की ताल ठोकने वाले प्रदेश सरकार अपने आप को आदिवासी हितैशी बताते हैं। किन्तु हमारे पंचायत क्षेत्र में जान जोखिम में डालकर गरीब आदिवासी बच्चे बदहाल और जर्जर भवन में रहने विवश हैं। यह अव्यवस्था विभागीय निष्कर्षता का प्रमाण है। इस भवन की दयनीय स्थिति का शिकायत शीघ्र मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में करेंगे। वास्तव में बच्चों को नये और मजबूत भवन की आवश्यकता है।
तारेश साहू, उपसरपंच - ग्राम पंचायत खल्लारी








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