सूरजपुर, 8 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में पुलिसकर्मी के परिवार से जुड़े दोहरे हत्याकांड में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। त्वरित अदालत ने पुलिस प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में तीन दोषियों को मृत्युदंड और चौथे दोषी को उम्रकैद की सजा दी है। सरकारी वकील के मुताबिक, अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाईं।
जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने कुलदीप साहू (32), चंद्रकांत चौधरी (28) और फूल सिंह उर्फ रिंकू (28) को मौत की सजा सुनाई। वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20) को आजीवन कारावास दिया गया। मृत्युदंड पर आगे की कानूनी प्रक्रिया लागू होगी; सत्र अदालत का फैसला अपने-आप अंतिम निष्पादन नहीं होता।
क्या था मामला?
पुलिस के अनुसार, घटना 13 अक्टूबर 2024 की रात की है। उस रात दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के रास्ते पर ड्यूटी कर रहे आरक्षक घनश्याम सोनी पर कुलदीप साहू ने कथित तौर पर गर्म तेल फेंका था। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने साहू को पकड़ने के लिए तलाश शुरू की। पुलिस का कहना है कि उसे पकड़ने की कोशिश के दौरान उसने पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने का प्रयास किया और फिर मौके से भाग गया।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद साहू प्रधान आरक्षक के घर में घुसा, जहां उनकी पत्नी और बेटी पर हमला किया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि महिला और बच्ची के साथ बर्बर मारपीट की गई और महिला का यौन उत्पीड़न भी हुआ। आरोप था कि साहू ने अन्य आरोपियों की मदद से दोनों की हत्या की और शवों को घर से करीब चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव में फेंक दिया।
अदालत में किन सबूतों का जिक्र हुआ?
सरकारी वकील सुरेश शर्मा के अनुसार, महिला के शरीर पर चोट के 33 और बच्ची के शरीर पर 28 निशान पाए गए थे। अभियोजन ने आरोपियों के कपड़ों पर मिले खून और कुलदीप साहू से जुड़े फिंगरप्रिंट साक्ष्य का भी हवाला दिया। सरकारी वकील ने कहा कि सुनवाई के दौरान इन साक्ष्यों को चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया।
परिवार ने फैसले का स्वागत किया
पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि परिवार ने लंबे समय तक गहरा दुख झेला है और अदालत का निर्णय उन्हें इस पीड़ा से उबरने में मदद कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद प्रधान आरक्षक मानसिक रूप से टूट गए थे और कठिन समय में पुलिस विभाग ने उनका साथ दिया। परिवार की पहचान सुरक्षित रखने के लिए संबंधित परिजन का नाम बदला हुआ बताया गया है।
परिजन ने पिछले महीने एक अलग मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत परिसर से बाहर निकलते समय कुलदीप साहू के मुस्कुराते हुए वीडियो पर भी प्रतिक्रिया दी। उस मामले में पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश से जुड़े आरोप थे। परिजन ने कहा कि उस दृश्य से उन्हें दुख पहुंचा। यह प्रतिक्रिया परिवार का पक्ष है; इसे अदालत के मौजूदा फैसले के अलग तथ्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत का फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। भारत में सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को लागू करने से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है। आगे की अपील या अन्य कानूनी कदमों की स्थिति संबंधित अदालत के रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
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