बागबाहरा/ छत्तीसगढ़ सरकार भले ही विकसित छत्तीसगढ़ और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के बड़े - बड़े दावे कर रही हो, लेकिन महासमुंद जिले के विधानसभा सभा खल्लारी क्षेत्र में बागबाहरा विकासखंड के ग्राम पंचायत मरार कसहीबाहरा मुख्यालय के आश्रित, आदिवासी बाहुल्य ग्राम पडकीपाली में आज भी विकास सिर्फ कागजों और आश्वासनों तक सीमित है। जहां पड़कीपाली गांव के नाले पर पुल और बदहाल कच्ची सड़क मार्ग को पक्की सड़क मार्ग बनाने के बहुचर्चित मांग पर लगातार चरणबद्ध तरीके से मांग उठती रहती है। इसी दरम्यान पड़कीपाली के ग्रामीणजनों ने गांव से नेशनल हाईवे क्रमांक 353 स्थित हाडाबंद ओवर ब्रिज तक साढ़े तीन किलोमीटर तक सड़क सत्याग्रह (पदयात्रा) किया गया है। सड़क सत्याग्रह पश्चात सभा के रूप में धरना प्रदर्शन भी हुआ। प्रदेश सरकार जहां राजस्व के 26 बच्छर पुरा होने के उत्सव मना रहे हैं और राजस्व के बाहने विकास के ताल ठोंक रहें हैं। किन्तु इस बीच पड़कीपाली वासी विकास के मुद्दों को लेकर सड़क सत्याग्रह (पदयात्रा) और धरना प्रदर्शन कर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया।
वहीं समापन पश्चात सभा स्थल में प्रशासन की ओर से बागबाहरा नायाब तहसीलदार नंदनी वर्मा, ग्रामीणजनों ने प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लेने पहुंचे थे।, साथ में लोक निर्माण विभाग के एसडीओअनिल अग्रवाल व विभागीय लोग भी मौजूद रहे। इस दौरान युवा, ग्रामीणजनों का अधिकारियों के बीच पक्की सड़क व मार्ग के नदी नाले पर पुल निर्माण के साथ विकास के मुद्दों पर भारी नोक झोक झुक हुआ। अधिकारीयों के समझाईस पर बजट सत्र तक इंतजार के आश्वासन पश्चात ज्ञापन सौंपा गया।
बता दें कि पदयात्रा की शुरुआत पड़कीपाली स्थित साहड़ा देवा में में पुजा अर्चना पश्चात पड़कीपाली से नेशनल हाईवे क्रमांक 353 तक पदयात्रा (सड़क सत्याग्रह) किया गया। इस दौरान पड़कीपाली करे पुकार, "पक्की सड़क और नाले में पुल बनाओ, छत्तीसगढ़ सरकार" के नारे के साथ आदिवासी बाहुल्य ग्राम पड़कीपाली के जर्जर व बदहाल सड़क मार्ग निर्माण के बहुचर्चित मांग को लेकर गांव के युवाओं व समस्त ग्रामवासियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में गांव वालों के द्वारा आयोजित सड़क सत्याग्रह में ग्रामीण, महिला, पुरूष, बुजुर्ग, युवा और बच्चों ने गांव से होके नेशनल हाईवे की ओर जाने वाली बदहाल कच्ची सड़क मार्ग से साढ़े तीन किलोमीटर का सफर तय कर हाड़ाबंद ओवर ब्रिज के समीप धरना प्रदर्शन में शामिल हुआ। गांव तक पक्की सड़क और मार्ग के नंदी नाले में पुल के मांगों को लेकर ग्रामीण और युवाओं ने सैंकड़ो बार शासन, प्रशासन को गांव के विकास को लेकर राज्य निर्माण के बाद से अनगिनत आवेदन, ज्ञापन सौंपकर थक चुके थे। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारे हैं। इस लिए अब तक कुछ भी नहीं हो सका, तब गांव के लोगों ने आंदोलन का निर्णय लिया और सड़क सत्याग्रह के रूप में पदयात्रा और धरणा प्रदर्शन कर अपनी बातों को शासन तक पहुंचाया है। ग्राम पड़कीपाली के पदयात्रियों व प्रदर्शनकारीयो ने क्षेत्रीय विधायक, सांसद, लोक निर्माण मंत्री, मुख्यमंत्री को लेकर मुर्दाबाद का नारे भी लगाये।

आयोजन के दौरान इससे पहले सभा स्थल में पदयात्रीयों ने नेशनल हाईवे में हाड़ाबंद ओवर ब्रिज के समीप सड़क किनारे में सभा के रूप में धरणा प्रदर्शन के मौके पर छत्तीसगढ़ महतारी व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के छायां चित्र में माल्यार्पण, पुष्प अर्पित भी किया। जहां सड़क सत्याग्रह के तहत आयोजित धरना प्रदर्शन को पड़कीपाली के ग्रामीण युवा भुनेश निषाद, मनोज ध्रुव, नरेंद्र निषाद, धनीराम ध्रुव, नुकेश यादव, गोबिंद यादव, तुका ध्रुव, दिपक ध्रुव, गंगेश्वर ध्रुव, पंकज ध्रुव, दिनदयाल ध्रुव, थानसिंग यादव, रानु बाई ध्रुव, बसंत बाई निषाद, भगवंतीन बाई निषाद, भावना ध्रुव आदि उपस्थित जनों ने भी सभा को सम्बोधित किया। वहीं आयोजन का मंच संचालन मनोज ध्रुव व अंत में आभार प्रदर्शन भुनेश निषाद ने किया। इस अवसर पर स्थानीय, ग्रामीणजनों में भुनेश निषाद, मनोज ध्रुव, गंगेश ध्रुव, एवन ध्रुव, दीपक ध्रुव, गोविन्द यादव, पंकज ध्रुव, तुकाराम ध्रुव, नरेंद्र निषाद, नूतन ध्रुव, थानसिंग यादव, ओमलाल निषाद, लालजी ध्रुव, धनीराम ध्रुव, भागवत ध्रुव, टीकाराम ध्रुव, मकुन्द निषाद, तमेश्वर यादव, रिखीराम ध्रुवदया ध्रुव, घनश्याम ध्रुव, दीनदयाल ध्रुव, शिव पटेल, लीलेश्वर निषाद, दयालु निषाद, खिलावन ध्रुव, जीतेन्द्र ध्रुव, खुमेश्वर ध्रुव, नरेन्द यादव, भोजराम ध्रुव, टेमन निषाद, प्रेम ध्रुव, ओमसिंग ध्रुव, आंनदराम ध्रुव, केशव निषाद, जनक ध्रुव, आनंदराम यादव, उत्तम ध्रुव, कौशल ध्रुव, नुतेश निषाद, रूद्र ध्रुव, लक्की यादव, योगेश निषाद, यशवंत ध्रुव, आशु पटेल, रानूबाई ध्रुव, टिकेश्वरी ध्रुव, रामहीन ध्रुव, भावना ध्रुव, प्रियंका यादव, गिरजा ध्रुव, सरस्वती ध्रुव, पुष्पा यादव, संध्या ध्रुव, रोशनी ध्रुव, रिद्धि यादव, मोनिका यादव, भगवनतिन निषाद, गोमती निषाद, रुखमनी पटेल सहित समाजसेवी व स्थानीय जनप्रतिनिधियों संहित बड़ी संख्या में गांव के महिला, पुरूष, बुजुर्ग, वरिष्ठजन, युवा एवं स्कूली बच्चे शामिल हुये। वहीं ग्रामीणों के सुरक्षा के दृष्टि खल्लारी थाना प्रभारी चाणक्य नाग भी पुलिस के जवानों के साथ तैनात रहे।
आदिवासी बाहुल्य गांव के मार्ग में सड़क बदहाल, सड़क की मांग करते थक चुके हैं, ग्रामीण
ग्राम पंचायत मरार कसहीबाहरा के आदिवासी आश्रित ग्राम पड़कीपाली के पहुंच मार्ग नेशनल हाईवे क्रमांक 353 से गांव तक महज साढ़े तीन किलोमीटर मार्ग के पक्की सड़क और नाले में पुल निर्माण हेतु राज्य निर्माण के बाद से लगातार मांग प्रत्येक स्तर किया जा रहा है। लेकिन इस मामले में शासन - प्रशासन की उदासीनता के चलते यह आदिवासी बाहुल्य गांव के मार्ग आज भी उपेक्षित है। वहीं बरसात के दिनों में गढ्ढों में पानी भर जाने पर यहां से गांव व राहगीरों को गुजरना मुश्किल होता है। तो आधिक बारिश से नंदी नाले के उफान से इस गांव का सम्पर्क दुसरे गांवो से टुट जाता है।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते गांव में विकास नहीं पहुंच सका
पड़कीपाली के ग्रामीणजन और युवाओं ने कहा कि सड़क और नाले में पुल निर्माण की बहुचर्चित मांग राज्य निर्माण के बाद से चल रही है। जो अब तक पुरा नहीं हो सका है। वहीं छत्तीसगढ़ में यह स्थान महासमुंद जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूरी में यह गांव बसा है। जो आज भी विकास को तरस रहा है। वर्षा काल में पुल और सड़क के अभाव में पड़कीपाली गांव टापू बन जाता है। इस आदिवासी बाहुल्य गांव की खराब स्थिति सरकार एवं क्षेत्रीय खल्लारी विधायक व महासमुंद सांसद सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की ओर इंगित करती है। वहीं लगातार उपेक्षाओं के कारण ग्राम पड़कीपाली आज भी बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित है। जिसके चलते सड़क सत्याग्रह और धरना प्रदर्शन के रूप में सभी ग्रामीणजनों ने यहां प्रमुखता से शासन - प्रशासन तक अपने इस बहुप्रतीक्षित महत्वपूर्ण मांग की आवाज बुलंद किया है। वहीं उपस्थित ग्रामीणजन व युवाओं ने इस आंदोलन के माध्यम से पड़कीपाली की उक्त साढ़े तीन किलोमीटर की सड़क और नाले में पुल निर्माण के लिए करोड़ की राशि शीघ्र स्वीकृति की पुर जोर मांग छत्तीसगढ़ सरकार से किया है।
---ग्रामीणों के लिए यहां कोई बड़ी शासकीय सुविधा नहीं -
यहां हाड़ाबंद मार्ग के अलावा कमरौद की ओर जाने वाला रास्ता भी बदहाल हो चुका है। कई स्थानों पर सड़क की पहचान तक मिट गई है। गांव में आंगनबाड़ी और पांचवीं तक की स्कूल के बाद कोई बड़ी शासकीय सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां आंगनबाड़ी भवन भी पिछले कुछ वर्षों से जर्जर है। जिसके चलते आंगनबाड़ी अन्य दुसरे भवन में संचालित हो रही है। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए ग्रामीणों को दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क और पुल बन जाए तो न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि गांव के सामाजिक और आर्थिक विकास की राह भी खुलेगी। वहीं ग्रामीणजनों का यह भी मानना है कि साढ़े तीन किलोमीटर सड़क और पुल का निर्माण केवल सुविधा का नहीं, बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी सवाल है। इस लिए इसे प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति देकर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाना चाहिए। ग्रामीण बताते हैं कि यहां कच्ची सड़क पुल अव्यवस्थित होने के कारण गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई या अस्थायी साधनों से मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। विचित्र बात तो यह है कि शासन प्रशासन को आवेदन और सोशल मीडिया के माध्यम से अवगत कराये जाने बाद भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क और नंदी नाले में पुल आज तक राज्य निर्माण के इस 26 वर्ष में भी नहीं बन सका, तो क्या यही विकास है?






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