बागबाहरा, महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत मरार कसहीबाहरा के आश्रित आदिवासी बाहुल्य ग्राम पड़कीपाली के ग्रामीणों ने पक्की सड़क और नंदी नाले पर पुल निर्माण की मांग को लेकर सड़क सत्याग्रह किया। ग्रामीण गांव से राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 353 पर हाड़ाबंद ओवरब्रिज तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर पदयात्रा कर पहुंचे और वहां सड़क किनारे धरना-प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि राज्य गठन के बाद से वे इस मांग को लेकर लगातार आवेदन और ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है।
‘पक्की सड़क और नाले में पुल बनाओ’ के नारे लगाए
पदयात्रा की शुरुआत पड़कीपाली स्थित साहड़ा देवा में पूजा-अर्चना के बाद हुई। ग्रामीणों ने ‘पड़कीपाली करे पुकार, पक्की सड़क और नाले में पुल बनाओ’ के नारे लगाते हुए बदहाल कच्चे मार्ग से हाड़ाबंद ओवरब्रिज तक मार्च किया। प्रदर्शन में गांव के महिला-पुरुष, बुजुर्ग, युवा और बच्चे शामिल हुए। धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ महतारी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्रों पर माल्यार्पण भी किया गया।
अधिकारियों को सौंपा राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
प्रदर्शन के समापन पर प्रशासन की ओर से बागबाहरा की नायब तहसीलदार नंदनी वर्मा और लोक निर्माण विभाग के एसडीओ अनिल अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच सड़क निर्माण, नंदी नाले पर पुल तथा गांव की अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान तीखी बहस भी हुई। अधिकारियों की ओर से बजट सत्र तक इंतजार करने की बात कहे जाने के बाद ग्रामीणों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
बारिश में गांव का संपर्क टूटने की समस्या
ग्रामीणों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग 353 से गांव तक लगभग साढ़े तीन किलोमीटर का पहुंच मार्ग कच्चा और बदहाल है। बरसात में सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से आवागमन कठिन हो जाता है। नंदी नाले में पानी बढ़ने पर गांव का आसपास के गांवों से संपर्क भी टूट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल के अभाव में मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को मुख्य मार्ग तक पहुंचाने में परेशानी होती है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी सुविधाओं के लिए निर्भरता
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आंगनबाड़ी और पांचवीं कक्षा तक का स्कूल है, लेकिन स्वास्थ्य, बैंकिंग और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है। उनके अनुसार, आंगनबाड़ी भवन भी जर्जर होने के कारण दूसरे भवन में संचालित हो रही है। कमरौद की ओर जाने वाला रास्ता भी कई जगह खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क और पुल बनने से आवागमन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और गांव के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी मदद मिलेगी।
लंबे समय से मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन
ग्रामीणों और युवाओं ने कहा कि वे सड़क और पुल निर्माण के लिए कई बार शासन-प्रशासन को आवेदन व ज्ञापन दे चुके हैं। मांग पूरी नहीं होने के कारण उन्होंने पदयात्रा और धरना-प्रदर्शन के जरिए अपनी आवाज उठाने का निर्णय लिया। प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। ग्रामीणों ने करीब साढ़े तीन किलोमीटर सड़क और नाले पर पुल निर्माण के लिए जल्द बजट स्वीकृत कर काम शुरू कराने की मांग की।
कार्यक्रम में भुनेश निषाद, मनोज ध्रुव, नरेंद्र निषाद, धनीराम ध्रुव, नुकेश यादव, गोबिंद यादव, तुका ध्रुव, दीपक ध्रुव, गंगेश्वर ध्रुव, पंकज ध्रुव, दिनदयाल ध्रुव, थानसिंग यादव, रानु बाई ध्रुव, बसंत बाई निषाद, भगवंतीन बाई निषाद और भावना ध्रुव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। मंच संचालन मनोज ध्रुव ने किया और भुनेश निषाद ने आभार व्यक्त किया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए खल्लारी थाना प्रभारी चाणक्य नाग पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि सड़क और नाले पर पुल निर्माण को प्राथमिकता देते हुए जल्द स्वीकृति दी जाए, ताकि बरसात सहित पूरे वर्ष गांव का संपर्क सुचारु बना रहे।






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