महासमुंद, 15 अक्टूबर 2026। बेटियों की पूजा करने वाला समाज उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी भी निभाए—इसी सोच को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से महासमुंद में “कन्या पूजन से कन्या संरक्षण तक” कार्यक्रम आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर अंबेडकर भवन, बागबाहरा रोड में हुए इस आयोजन में करीब 350 किशोरी बालिकाएं और माताएं शामिल हुईं। कार्यक्रम में बालिकाओं के स्वास्थ्य, कैंसर से बचाव, मानसिक मजबूती और सुरक्षित बचपन से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कन्या पूजन के साथ जागरूकता रथ को हरी झंडी
कार्यक्रम की शुरुआत कन्या पूजन और जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर की गई। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा को बालिकाओं के अधिकारों, स्वास्थ्य और संरक्षण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बेटियों के प्रति सम्मान केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और समान अवसरों के रूप में भी दिखाई देना चाहिए।
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सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
बालको कैंसर हॉस्पिटल, नया रायपुर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की डॉ. यामिनी शुक्ला भविष्यकर ने सर्वाइकल कैंसर और उससे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने HPV संक्रमण, शुरुआती चरण में लक्षण स्पष्ट नहीं होने की स्थिति, समय पर जांच और टीकाकरण के महत्व को समझाया। HPV टेस्ट और पैप स्मियर जैसी जांचों के प्रति जागरूकता को भी महत्वपूर्ण बताया।
इसी अस्पताल की ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनीशा ने ब्रेस्ट कैंसर के संभावित लक्षणों और बचाव पर चर्चा की। उन्होंने गांठ, स्तन के आकार में बदलाव या त्वचा में असामान्य परिवर्तन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने पर जोर दिया।
किशोरियों के स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती पर फोकस
एम्स रायपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ आकांक्षा साहू ने किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया। वहीं, ITSA हॉस्पिटल, रायपुर की बाल मनोचिकित्सक डॉ. इशिका जायसवाल ने मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास की भूमिका को रेखांकित किया।
बाल मनोचिकित्सक डॉ. गार्गी पांडेय ने बच्चों की सुरक्षा, अभिभावकों के साथ संवाद और सकारात्मक व्यवहार के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल, बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत के बच्चों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के प्रति भी अभिभावकों को सचेत किया।
नुक्कड़ नाटक ने दिया बालिका संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बालिकाओं के संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। आयोजन में शामिल किशोरियों और माताओं ने कार्यक्रम की सराहना की तथा बेटियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया।
बेटियों को सुरक्षित भविष्य देना ही सच्चा सम्मान
कार्यक्रम का संदेश साफ रहा—कन्या पूजन की परंपरा तभी सार्थक है, जब बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित वातावरण मिले। बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी जरूरी है, ताकि हर बेटी भयमुक्त वातावरण में अपने सपनों को साकार कर सके।








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