महासमुंद, 14 अक्टूबर। रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले महासमुंद जिले के मजदूरों की सुरक्षा और उनके कथित शोषण के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मजदूर पलायन से जुड़े मामले में पिछले महीने एक करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये की जब्ती और पांच कथित मजदूर दलालों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब जिला प्रशासन ने ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों को बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के दूसरे राज्यों में ले जाने और उनके अधिकारों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में अंतर्राज्यीय प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा शर्त) अधिनियम, 1979 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। श्रम अधिकारी डी.एन. पात्र, श्रम निरीक्षक अलीम नियाजी तथा लाइसेंसधारी और गैर लाइसेंसधारी लेबर सप्लायर एवं ठेकेदार भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने श्रमिकों के पंजीयन, पलायन संबंधी दस्तावेजों और कार्यस्थल पर मिलने वाली सुविधाओं को लेकर निर्देश दिए।
यह भी पढ़ें: महासमुंद में मजदूर पलायन पर प्रशासन सख्त, ठेकेदारों को कड़े निर्देश
एक करोड़ से अधिक की जब्ती के बाद कार्रवाई तेज
मजदूर पलायन से जुड़े मामले में पिछले महीने पुलिस ने एक करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये जब्त किए थे। कार्रवाई के दौरान पांच कथित मजदूर दलालों के खिलाफ संगठित अपराध सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस को श्रमिकों के पलायन से संबंधित दस्तावेज, डायरियां और नोट गिनने की मशीन भी मिली थी।
इस कार्रवाई के बाद मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजने की प्रक्रिया, बिचौलियों की भूमिका और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। प्रशासन की ताजा बैठक को पलायन की प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने और कानून का पालन सुनिश्चित करने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
यूपी-बिहार के ईंट भट्ठों में शोषण के आरोप
महासमुंद जिले से बड़ी संख्या में मजदूर अस्थायी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। आर्थिक मजबूरी के कारण बाहर जाने वाले कुछ श्रमिकों के शोषण और बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में फंसने के आरोप सामने आते रहे हैं। शिकायतों के मुताबिक, कुछ ठेकेदार मजदूरों को उत्तर प्रदेश और बिहार के ईंट भट्ठों में काम के लिए ले जाते हैं, जहां उन्हें आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में श्रमिकों को सुरक्षित वापस लाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन के सामने चुनौती बन जाता है।
बिना लाइसेंस मजदूर ले गए तो होगी कार्रवाई
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि बिना लाइसेंस मजदूरों को दूसरे राज्यों में ले जाने की अनुमति नहीं है। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों और उनके परिवारों को रहने की उचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय तथा अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराना ठेकेदारों की जिम्मेदारी है।
कलेक्टर ने श्रमिकों के साथ जाने वाले बच्चों की शिक्षा और बाल संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों से जोड़ने के लिए जरूरी व्यवस्था की जाए, ताकि रोजगार के लिए पलायन करने वाले परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
मजदूर को बंधक बनाया तो बर्दाश्त नहीं
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने ठेकेदारों को श्रम पंजीयन से संबंधित सभी दस्तावेज दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी श्रमिक को जबरन रोककर नहीं रखा जाना चाहिए। यदि कोई मजदूर अपने घर लौटना चाहता है, तो उसे घर जाने दिया जाए। बीमार श्रमिकों और उनके आश्रितों को इलाज की सुविधा मिले तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उपचार के लिए कार्यस्थल से जाने दिया जाए।
एसपी ने यह भी निर्देश दिया कि श्रमिक की आकस्मिक मृत्यु होने पर उसके गृह क्षेत्र में रहने वाले परिजनों को एक दिन के भीतर सूचना दी जाए। परिजनों को जानकारी दिए बिना अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन और दस्तावेजों का सही होना किसी अपराध या आपात स्थिति में श्रमिकों को समय पर सहायता दिलाने में महत्वपूर्ण है।
पलायन रजिस्टर में दर्ज होगी पूरी जानकारी
श्रम पदाधिकारी डी.एन. पात्र ने बताया कि लाइसेंसधारी ठेकेदार उतने ही श्रमिकों को बाहर ले जा सकते हैं, जितनी संख्या के लिए उन्हें लाइसेंस मिला है। पलायन से पहले ग्राम पंचायत के रजिस्टर में श्रमिक का नाम, कार्यस्थल का शहर और राज्य, कंपनी का नाम, काम की अवधि तथा मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। सूची में शामिल कोई श्रमिक नहीं जाता और उसकी जगह दूसरा श्रमिक जाता है, तो रजिस्टर में संशोधन कर इसकी सूचना जिला श्रम कार्यालय और नजदीकी थाने को देनी होगी।
अब जमीन पर अमल की होगी असली परीक्षा
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रमिकों की सुरक्षा, पंजीयन और बुनियादी सुविधाओं के मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, इन निर्देशों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दूसरे राज्यों में काम कर रहे श्रमिकों की स्थिति की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी होती है, शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और शोषण के आरोपों की जांच कर पीड़ितों को समय पर राहत कैसे दिलाई जाती है। मजदूरों को सुरक्षित रोजगार और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना ही इस पूरी कार्रवाई की सबसे बड़ी कसौटी होगी।








टिप्पणियाँ (0)