महासमुंद। जिले से होने वाले मजदूर पलायन और श्रमिकों के कथित शोषण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पिछले महीने पुलिस की कार्रवाई में एक करोड़ 48 लाख 54 हजार रुपये जब्त किए जाने और पांच कथित मजदूर दलालों के खिलाफ कार्रवाई के बाद प्रशासन ने ईंट भट्ठा सरदारों और ठेकेदारों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अअनुसार आज जिला मुख्यालय में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और श्रम विभाग की अगुवाई में छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा के पंजीकृत ईंट भट्ठा सरदारों को महासमुंद जिला मुख्यालय बुलाकर उनकी बैठक गई। बैठक में अंतरराज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने और मजदूरों के पलायन से संबंधित नियमों की अनदेखी नहीं करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मजदूरों की बेबसी और शोषण का गंभीर सवाल
रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले मजदूरों की आर्थिक मजबूरी कई बार उनके शोषण का कारण बन जाती है। आरोप हैं कि कुछ ठेकेदार मजदूरों को उत्तर प्रदेश और बिहार के ईंट भट्ठों में काम के लिए ले जाते हैं, जहां कई श्रमिक बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में फंस जाते हैं। मजदूरों के आर्थिक और दैहिक शोषण की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में पीड़ितों की गुहार पर उन्हें मुक्त कराकर वापस लाना प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी सख्ती
पिछले महीने मजदूर पलायन से जुड़े मामले में पुलिस ने एक करोड़ 48 लाख 54 हजार रुपये जब्त किए थे। कार्रवाई के दौरान पांच कथित मजदूर दलालों के खिलाफ संगठित अपराध सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस को मजदूरों के पलायन से संबंधित दस्तावेज, कई डायरियां और नोट गिनने की मशीन भी मिली थी।
इस कार्रवाई के बाद मजदूर पलायन से जुड़े नेटवर्क और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। प्रशासन की बैठक को नियमों के पालन को सुनिश्चित करने और निगरानी बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने भट्ठा सरदारों और ठेकेदारों को निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूसरे राज्यों में काम करने जाने वाले मजदूरों के अधिकारों और सुरक्षा की अनदेखी न हो तथा पलायन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप संचालित हो।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जारी निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई और पीड़ित श्रमिकों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने अहम चुनौती है।








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