महासमुंद। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के पावन अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत आयोजित रक्तदान, अंगदान एवं देहदान के लिए आयोजित शिविर में आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक दंपत्ति, निलेश खांडे और उनकी पत्नी चित्ररेखा तारक ने समाज के सामने एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। तुमगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इस दंपत्ति ने मरणोपरांत अपना शरीर दान (देहदान) करने का संकल्प पत्र भरा। उनका यह कदम न सिर्फ युवाओं के लिए एक नई सीख है, बल्कि समाज को यह भी बताता है कि जीवन के बाद भी मानवता की सेवा कैसे की जा सकती है।

देहदान का मूल्य और इसके फायदे: क्यों जरूरी है यह कदम?
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मृत्यु के बाद आमतौर पर पंचतत्वों से बने शरीर को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है या दफना दिया जाता है, जिससे देह का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। लेकिन, देहदान एक ऐसा पुनीत कार्य है जो मृत्यु को भी सार्थक बना देता है:
चिकित्सा शिक्षा में मील का पत्थर: मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए मानव शरीर (कैडेवर) की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। दान की गई देह से ही भावी डॉक्टर मानव शरीर की वास्तविक संरचना (Anatomy) को गहराई से समझ पाते हैं।
हजारों जिंदगियां बचाने का माध्यम: जब एक छात्र दान की गई देह पर अभ्यास करके कुशल डॉक्टर बनता है, तो वह अपने पूरे करियर में हजारों मरीजों की जान बचाता है। यानी आपका एक देहदान अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत जिंदगियों को जीवनदान देता है।
मेडिकल रिसर्च में सहायक: नई बीमारियों के इलाज और सर्जिकल तकनीकों की खोज में भी मृत देह का परीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी समाज को समर्पण
महासमुंद जिले में निलेश खांडे और चित्ररेखा तारक की पहचान बेहद कर्मठ और बच्चों के प्रति समर्पित अधिकारियों के रूप में होती है। विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ-साथ, छात्रावासों में रहने वाले छात्र छात्राओं के प्रति उनका असीम स्नेह जगजाहिर है। इस दंपत्ति ने यह साबित कर दिया है कि वे जीते जी ही नहीं, बल्कि अपनी मृत्यु को भी समाज और विज्ञान के लिए उपयोगी बनाना चाहते हैं। इनके द्वारा पूर्व में भी नेत्रदान का संकल्प जीवन दीप समिति जांजगीर के समक्ष की जा चुकी है साथ ही नीलेश खांडे ने अब तक 47 बार एवं चित्ररेखा ने 6 बार रक्तदान कर कई जरूरतमंद को जीवन जीने में सहायता की है।
प्रशासन ने की जमकर सराहना
दंपत्ति के इस साहसिक, शाश्वत और परोपकारी निर्णय की प्रशासनिक अमले ने भी खुले दिल से प्रशंसा की है। जिला कलेक्टर विनय लंगेह, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शिल्पा साय सहित अन्य जिला अधिकारियों ने इस कदम को मानवता के लिए अत्यंत सराहनीय बताया।
निश्चित तौर पर, निलेश और चित्ररेखा का यह फैसला जिले और प्रदेश में देहदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करेगा और सैकड़ों लोगों को इस महादान के लिए प्रेरित करेगा।








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