अपनों के लिए तो सभी जीते हैं, गैरों के लिए जीना ही मानवता है अशोक पवार —स्वर्गधाम सेवा समिति
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धमतरी। “अपनों के लिए तो सभी जीते हैं, गैरों के लिए जीने का नाम ही मानवता है।” इस विचार को वर्षों से अपने सेवा कार्यों के माध्यम से चरितार्थ कर रही है धमतरी की स्वर्गधाम सेवा समिति। लावारिस एवं अनजान शवों को विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर सद्गति प्रदान करने वाली यह समिति मानवता की एक ऐसी मिसाल बन चुकी है, जिसकी सेवा को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
25 वर्ष पूर्व धमतरी में स्वर्गधाम सेवा समिति का गठन समाजसेवी एवं पूर्व प्राचार्य तथा समिति के महासचिव अशोक पवार, अध्यक्ष एवंत गोलछा सहित कुछ गिने-चुने सेवाभावी लोगों ने मिलकर किया था। उस समय समिति के सामने अनेक चुनौतियां थीं। पुलिस, अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग और अन्य व्यवस्थाओं से समन्वय बनाकर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करना आसान काम नहीं था।
शुरुआती दौर में समिति के सदस्यों को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन महासचिव अशोक पवार के अनुभव, व्यवहार-कुशलता और सेवा भावना ने इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया। किस परिस्थिति में किससे किस तरह संवाद कर काम को सहज बनाया जाए, इसका उन्हें वर्षों का अनुभव है।
स्वर्गधाम सेवा समिति ने अपने सेवा कार्य में कभी यह नहीं देखा कि शव किसका है, उसका परिवार कौन है या उसे पहचानने वाला कोई है या नहीं। सड़े-गले और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में मिले शवों के सामने जहां आम व्यक्ति जाने से भी हिचकिचाता है, वहीं समिति के सदस्य मानवता का दायित्व निभाते हुए ऐसे शवों का भी विधि-विधान से अंतिम संस्कार करते हैं।
बताया जाता है कि समिति अब तक 700 से अधिक लावारिस एवं अनजान शवों को अंतिम संस्कार के माध्यम से सद्गति प्रदान करने में अपनी भूमिका निभा चुकी है। इस सेवा कार्य में समिति के महासचिव अशोक पवार, अध्यक्ष. एवंत गोलछा सहित सभी सदस्य मानवता के मिसाल है








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