रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ ने वर्ष 2023 में जारी 12,489 पदों की शिक्षक भर्ती के विज्ञापन को रद्द कर दिया है। अदालत ने 29 नवंबर 2012 की आरक्षण अधिसूचना के आधार पर तैयार किए गए मॉडल रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली। इस फैसले से प्रदेश में शिक्षक भर्ती की आरक्षण व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।
हालांकि, अदालत ने पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश नहीं दिया है। उनकी नियुक्ति और पदोन्नति से संबंधित आगे का निर्णय सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।
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60 प्रतिशत से अधिक आरक्षण पर उठे सवाल
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने भर्ती के लिए अपनाए गए आरक्षण रोस्टर को चुनौती देते हुए दलील दी कि कुछ संवर्गों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण 60 प्रतिशत से भी अधिक हो गया था। इससे अनारक्षित और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए उपलब्ध पदों पर असर पड़ने का दावा किया गया।
याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, ई-कैडर के 1,113 पदों में से 698 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। यह कुल पदों का लगभग 62.71 प्रतिशत था। वहीं, टी-कैडर के 4,659 पदों में से 3,105 पद एसटी वर्ग के लिए निर्धारित किए गए थे, जो लगभग 66.64 प्रतिशत बैठता है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस तरह तैयार किया गया रोस्टर पूर्व में न्यायिक रूप से निरस्त आरक्षण व्यवस्था पर आधारित था और इसे नई भर्ती में लागू करना उचित नहीं था।
2012 की आरक्षण अधिसूचना बनी विवाद की जड़
विवाद राज्य सरकार की 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना से जुड़ा है। इसके तहत अनुसूचित जाति के लिए 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया था। इस व्यवस्था के तहत कुल आरक्षण 58 प्रतिशत हो गया था।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 19 सितंबर 2022 को इस आरक्षण व्यवस्था और उससे जुड़े मॉडल रोस्टर को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद राज्य शासन ने 4 मई 2023 को सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पदों पर भर्ती के लिए व्यापमं के माध्यम से विज्ञापन जारी किया। इसी विज्ञापन में लागू किए गए रोस्टर को अदालत में चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी आगे की प्रक्रिया
2012 की आरक्षण व्यवस्था को हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई 2023 को पहले से चल रही भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं को अंतिम निर्णय के अधीन जारी रखने की अनुमति दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि पहले से निरस्त आरक्षण व्यवस्था के आधार पर नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के मौजूदा फैसले में भर्ती विज्ञापन को रद्द किए जाने से यह विवाद फिर महत्वपूर्ण हो गया है।
नियुक्त शिक्षकों को तत्काल हटाने का आदेश नहीं
फैसले का अहम पहलू पहले से नियुक्त शिक्षकों की स्थिति है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने मौजूदा शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश नहीं दिया है। उनकी नियुक्ति और पदोन्नति से संबंधित प्रश्न सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम परिणाम से जुड़े रहेंगे।
इसलिए इस फैसले को प्रदेश के सभी शिक्षक पदों पर नियुक्तियां तत्काल समाप्त होने के रूप में देखना उचित नहीं होगा। आगे की स्थिति न्यायालयों के आदेशों और शासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
भर्ती व्यवस्था और आरक्षण नीति पर फिर बढ़ी निगाहें
छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती का यह मामला केवल एक विज्ञापन तक सीमित नहीं है। इससे आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया, न्यायिक आदेशों के अनुपालन और विभिन्न वर्गों के लिए पदों के निर्धारण जैसे अहम सवाल जुड़े हैं।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य शासन की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का परिणाम महत्वपूर्ण होगा। भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए भी आगे की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक निर्णय पर नजर रखना जरूरी है।
संपादकीय नोट: प्रकाशन से पहले हाईकोर्ट के प्रमाणित आदेश से फैसले के दायरे और भर्ती विज्ञापन के निरस्तीकरण संबंधी विवरण का मिलान करें।








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