धमतरी। जिले के ग्राम पंचायत सियादेही, धमतरी में आयोजित एनएसएस शिविर के अंतर्गत विधिक सेवा के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री धनंजय तिवारी, पैनल अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस काउंसिल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, धमतरी थे।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं के रूप में श्री दुर्गेश प्रसाद, विभागाध्यक्ष, विधि विभाग, तथा डॉ. सपना ताम्रकार, सहायक प्राध्यापक, विधि विभाग, बीसीएस पीजी कॉलेज, धमतरी ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्री भीषम साहू तथा श्रीमती कल्पना भी उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता श्री धनंजय तिवारी ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, विधिक अधिकारों एवं विवाद समाधान के विधिक मार्गों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने साइबर अपराध तथा पॉक्सो अधिनियम से संबंधित प्रावधानों, सावधानियों एवं शिकायत करने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी, अज्ञात लिंक, ओटीपी साझा करने तथा सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचाव हेतु सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों को निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
श्री दुर्गेश प्रसाद ने भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों के साथ-साथ नागरिकों के विधिक अधिकारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों को जानना और विधि के मार्ग से उनका उपयोग करना ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है।
डॉ. सपना ताम्रकार ने घरेलू हिंसा तथा महिलाओं के विधिक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को घरेलू हिंसा से संबंधित कानूनी सुरक्षा, सहायता के उपाय तथा पीड़ित होने पर उपलब्ध विधिक मार्गों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी भी प्रकार के शोषण या हिंसा के विरुद्ध चुप न रहकर विधिक सहायता लेनी चाहिए।
कार्यक्रम में बीसीएस पीजी कॉलेज, धमतरी के एनएसएस स्वयंसेवक, विधि विभाग के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। एनएसएस शिविरों का उद्देश्य स्थानीय समुदाय को जोड़कर जन-जागरूकता और सामुदायिक सेवा को बढ़ावा देना है।
वक्ताओं ने कार्यक्रम में बताया कि किसी भी विधिक समस्या के समाधान हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अपने विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।








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